कृषि

A. भारत में कृषि अभी भी मात्र जीवन निर्वाह का साधन है.कृषि योग्य भूमि का क्षेत्रफल लगातार कम होते जाना और कम उपज इसके मूल कारण हैं.रासायनिक खाद के बेजा इस्तेमाल ने भूमि  को अत्यधिक खारा बना दिया है और उपजाऊ परत का क्षरण हुआ है.भूमि को उपजाऊ और वातावरण के अनुकूल बनाने की अत्यधिक ज़रूरत है. किसानों की मदद यथा संभव होनी चाहिए जिससे वे उपज में बढ़ोत्तरी करें और उत्पाद की गुणवत्ता भी बढ़ा सकें.

B. किसानों की क्षमताओं और जानकारी में वृद्धि करने की ज़रूरत है: कृषि संरक्षण :  कम लागत में उत्पादन और उत्पाद की वृद्धि में नए तकनीकी तरीके सहायक हैं.समाज सेवी संस्थाएं किसानों को नयी तकनीकें अपनाने के लिए प्रेरित कर सकती हैं. जानकारी की साझेदारी :समाज सेवी संस्थाएं  सामुदायिक संगठनों,किसान समूहों से साझेदारी कर विकास योग्य तकनीकों , बेहतर स्वास्थ्य और  रोज़गार के अवसर प्राप्त करने  की दिशा में सार्थककदम उठा सकती हैं.

C. नयी तकनीक का प्रवेश ,उच्च स्तर के सस्ते निवेश,  उत्पादन क्षमता का विकास और किसानों का सशक्तिकरण ,  परिवर्तन द्वारा कृषि क्षेत्र में किये गए प्रयास हैं. हरियाली कृषि ज्ञान केंद्र बीज , खाद और तकनीक की जानकारी देने का केंद्र है.परिवर्तन किसान क्लब और किसान चौपाल में कृषि सम्बन्धी समस्यायों और उनके समाधान  पर चर्चा होती है.  ज़मीन पर प्रदर्शन और प्रयोग किये जाते हैं जिससे प्रत्यक्ष तौर पर जानकारी प्राप्त हो.बीज तथा मौसम के अनुसार रोपाई बोवाई की भी वैज्ञानिक तरीके से जानकारी दी जाती है.बायोडायवर्सिटी इंटरनेशनल, ऑय ए आर ऑय (पूसा),ऑय सी ए आर,  आर सी ई आर (पटना ) कृषि विभाग (सिवान) और सी एस ऑय एस ए (सिरीअल सिस्टम्स इनिशिएटिव्स फॉर साउथ एशिया ) जैसे संस्थानों के साथ मिलकर परिवर्तन यह काम कर रहा है.

D. अपने अनुभव तथा ज्ञान को किसानों के साथ बाँटें हमसे बात करें और  हमारे साथ साझेदारी करें/ हमारे सहयोगी बनें