महिला सशक्तिकरण और किशोर लड़कियां

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महिला सशक्तिकरण और किशोर लड़कियां

A. लैंगिक असमानता और पक्षपात एक वैश्विक चुनौती है.आर्थिक तौर पर तथा शिक्षा के क्षेत्र में स्त्रियाँ ,पुरुषों के मुकाबले अभी बहुत पीछे हैं. ज़मीनी स्तर पर राजनीति में आरक्षण की सुविधा की वजह से कुछ प्रतिनिधित्व हुआ है लेकिन वह नाकाफी है.रूढ़िवादी मान्यताओं ने स्त्री को अपने अधिकारों से वंचित रखा है.स्त्री सशक्तिकरण की ज़रूरत सिर्फ समाज में समानता का दृष्टिकोण विकसित करने के लिए नहीं है, बल्कि इससे समाज के विकास की भी दर मजबूत होती है यह सत्य स्वीकार करने की ज़रूरत है. लड़कियों की शिक्षा का असर ,जनसँख्या नियंत्रण, जच्चा और बच्चा के स्वस्थ जन्म और घटे हुए मृत्यु दर में भी दिखलाई पड़ता है. स्त्रियों के आर्थिक और सामाजिक सबलीकरण के दौरान अनेक औपचारिक /अनौपचारिक सामाजिक समीकरणों और   मान्यताओं को ठेस लग सकती है  इन्हें संवेदनशील तरीके से सुलझाने की ज़रूरत होगी.

B. स्वयं सेवी संस्थाएं स्त्रियों के सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं.क्षमता निर्माण :समुदायों से  कुछ प्रतिनिधि महिलाओं का चुनाव कर उन्हें सरकारी योजनाओं ,सहूलियतों और अधिकारों की जानकारी देना और नेतृत्व सामर्थ्य का निर्माण.लैंगिक विभेद को समझाना और उसके परंपरागत ढांचों को तोड़ने में सहायता करना: स्त्रियों को अनेक रूढ़ियाँ समाज में आगे बढ़ने से रोकती हैं.स्त्रियों की  सामाजिक और आर्थिक गतिशीलता पर भी रोक है. इसे बदलना बहुत ज़रूरी है.उनकी सेवा के क्षेत्रों को और व्यापक बनाने की ज़रूरत है . 

सुरुक्षा और गतिशीलता के सकारात्मक वातावरण के निर्माण की भी ज़रूरत है. योग्यता /कौशल विकसित करना :स्त्रियों को अगर व्यहवारिक ज्ञान दिया जाये तो वे न सिर्फ परिवार केआर्थिक देय में सहयोग कर सकती हैं बल्कि परिवार के भीतर निर्णयों में भी आत्मविश्वाश से  अपना मत प्रकट कर सकती हैं.स्कूल में अनिवार्य उपस्थिति : लड़कियां  अगर स्कूलों में अधिक समय तक उपस्थित रहेंगी और उच्च शिक्षा की ओर अग्रसर होंगी तो अल्पआयु में विवाहऔर  मातृत्व की थोपी गयी ज़िम्मेवारियों से, परिपक्व होने तक, बची रहेंगी. यह उनके बेहतर स्वास्थ्य के लिए भी ज़रूरी है.

C. महिला समाख्या इस दिशा में काम करने वाले केंद्र हैं. वे स्त्रियों में जागरूकता बढ़ाने और अधिकारों के प्रति सचेत करने का काम करते हैं. महिला समूह  गाँव में नियमित रूप से मिलते हैं और महिलाओं को स्वास्थ्य , शिक्षा,लैंगिक उत्पीड़न,आर्थिक सबलता और पंचायती राज सम्बन्धी जानकारियां देते हैं.  समुदायों में अलग से महिला समूह बनाने से उत्प्रेरणा मिलती है और साझेदारी का अनुभव होता है.किशोरी बैठक , किशोर लड़कियों की समस्याओं को संबोधित करने का परिवर्तन द्वारा किया गया प्रयास है. किशोरियों को लैंगिक पक्षपात की जानकारियां देना, सामाजिक न्याय की अवधारणा को समझाना, कानूनी अधिकारों के बारे में सजग करना और उनके कौशल को विकसित करना इन बैठकों का लक्ष्य है. 

D. अपने अनुभव और जानकारियां महिलाओं , लड़कियों और शिक्षकों से बांटे.हमसे बात करें और हमारे साथ साझेदारी करें/ हमारे सहयोगी बनें