“किसी को कितनी उत्तम शिक्षा मिली है इसका पता इससे नहीं लगाया जा सकता है की उसके पास किसी विश्वविद्यालय की उपाधि है या नहीं ; बल्कि इस बात से पता लगाया जा सकता है की उसे पुस्तकालय का उपयोग करना आता है की नहीं”
सर साइरिल नारवुड पुस्तकालय का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में अनायास ही आता है की अरे पुस्तकालय मतलब पुस्तकों का घर जहाँ पे अलग अलग प्रकार की अनेकानेक किताबें रखी गयीं होती हैं, जिसमे जाकर अपने रूचि अनुरूप किसी भी पुस्तक का लाभ लिया जा सकता है, पर पुस्तकालय सिर्फ पुस्तकों का घर ही नहीं अपितु समाज निर्माण का एक अहम् और सबसे सशक्त साधन भी है | समाज में सर्वोन्मुखी विकाश में पुस्तकालयों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है | पुस्तकालय विश्व के महानतम विचारों का आगर है | यह सिर्फ हमारे ज्ञान को ही नहीं बल्कि हमारी आत्मा का भी विस्तार करता है | किसी भी संस्थान का ह्रदय होता है उसका पुस्तकालय और यूँ कहें तो पुस्तकालय एक सामाजिक क्रांति की अग्रिम मशाल भी लेकर आता है | यह शिक्षा के प्रसार और सुचना के संचार का प्रभावशाली माध्यम है | समाज में अलग-अलग कई तरीके के पुस्तकालय होते हैं जैसे राष्ट्रिय पुस्तकालय, सामुदायिक एवं सार्वजानिक पुस्तकालय, व्यवसायिक पुस्तकालय, सरकारी पुस्तकालय, चिकित्सा पुस्तकालय और विश्वविद्यालय व् शिक्षण संस्थान के पुस्तकालय, सेना पुस्तकालय आदि |
1713 ई. मे अमरीका के फिलाडेलफिया नगर में सबसे पहले चंदे से चलनेवाले एक सार्वजनिक पुस्तकालय की स्थापना हुई । लाइब्रेरी ऑव कांग्रेस अमरीका का सबसे बड़ा पुस्तकालय हैं । इसकी स्थापना वाशिंगटन में सन्‌ 1800 में हुई थी । इसमें ग्रंथों की संख्या साढ़े तीन करोड़ हैं । इस पुस्तकालय में लगभग 2,400 कर्मचारी काम करते हैं । समय-समय पर अनेक पुस्तकों का प्रकाशन भी यह पुस्तकालय करता है और एक सप्ताहिक पत्र भी यहाँ से निकलता हैं । अमरीकन पुस्तकालय संघ की स्थापना 1876 में हुई थी और इसकी स्थापना के पश्चात्‌ पुस्तकालयों, मुख्यत: सार्वजनिक पुस्तकालयों का विकास अमरीका में तीव्र गति से होने लगा। सार्वजनिक पुस्तकालय कानून सन्‌ 1849 में पास हुआ था और शायद न्यू हैंपशायर अमेरीका का पहला राज्य था जिसने इस कानून को सबसे पहले कार्यान्वित किया। अमरीका के प्रत्येक राज्य में एक राजकीय पुस्तकालय है । सन्‌ 1885 में न्यूयार्क नगर में एक बालपुस्तकालय स्थापित हुआ। धीरे-धीरे प्रत्येक सार्वजनिक पुस्तकालय में बालविभागों का गठन किया गया। स्कूल पुस्तकालयों का विकास भी अमरीका में 20 वीं शताब्दी में ही प्रारंभ हुआ। पुस्तकों के अतिरिक्त ज्ञानवर्धक फिल्में, ग्रामोफोन रेकार्ड एवं नवीनतम आधुनिक सामग्री यहाँ विद्यार्थियों के उपयोग के लिए रहती हैं । आस्ट्रेलिया के प्रसिद्ध शहर कैनबरा में राष्ट्रसंघ पुस्तकालय की स्थापना 1927 में हुई । वास्तव में पुस्तकालय आंदोलन की दिशा में यह क्रांतिकारी अध्याय था । मेलबोर्न में विक्टोरिया पुस्तकालय की स्थापना 1853 में हुई थी |
पुस्तकालय स्थापना के इसी क्रम में भारत में भी राष्ट्रिय पुस्तकालय की स्थापना आजादी के एक साल बाद 1948 में कोलकता में की गयी | यह भारत का सबसे बड़ा पुस्तकालय हैं जिसे राष्ट्रिय महत्त्व संस्थान का का दर्जा प्राप्त हैं | इसके तिन साल बाद 1951 में दिल्ली में भी दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी की स्थापना की गयी | इन पुस्तकालयों को देखते हुए और इसके महत्त्व को समझते हुए अब धीरे-धीरे देश के प्रत्येक हिस्से में पुस्तकालय खोल दिए गए हैं |
अब हम तकनीक के तरफ हम आगे बढते जा रहे हैं इसी क्रम में आज विभिन्न स्कूली बच्चों के लिए डिजिटल लाइब्रेरी की शुरुआत की गयी हैं | इस पुस्तकालय में अलग-अलग विषय को पीडीऍफ़ में कर के एक सॉफ्टवेर के जरिये बच्चों तक पहुंचाया जा रहा है | इसके मोबाइल एप्लीकेशन भी अलग-अलग भाषा में उपलब्ध है | हालाँकि ये एक सोंच हैं की पुस्तकालय के उपयोग के लिए रूचि रखने वाले पाठक घर बैठे भी अपने रूचि के विषय को चुनकर पढ़ सकतें हैं |
आज अगर हम किसी भी प्रकार की नवीनतम जानकारी लेना चाहते हैं तो हम यह सोंचते हैं की इसका स्त्रोत क्या होगा ? और वो स्त्रोत मिलता हैं तो एक संस्थान या विद्यालय के रूप में | अंत में इन सभी जानकारियों के लिए हमें मदद मिलती हैं तो उस संस्था के अन्तःह्रदय पुस्तकालय से | हमारी सारी जिज्ञासाओं और मन के अन्दर उझलने वाले कौतुहल को शांति मिलती हैं तो पुस्तकालय से |
हमारे दृष्टिकोण से सामाजिक उत्थान में और बच्चों को सोंचने समझने और नव सृजन हेतु तैयार करने में पुस्तकालय अपना अहम् रोल निभाता हैं | एकलव्य संस्था से जुडी शोभा बाजपेयी पिछले 26 साल के अनुभव के आधार पर बतातीं हैं की “स्कूल में सक्रिय लायब्रेरी एक अत्यन्त महत्वपूर्ण संसाधन होती है। यह बच्चों में न सिर्फ पढ़ने की आदत विकसित करने में मदद करती हैं बल्कि इसके ज़रिए बच्चों को पाठ्य पुस्तकों से आगे बढ़कर जानने और समझने का मौका मिलता है” |
इनके प्रयास से एक ग्रामीण क्षेत्र में संचालित एक सरकारी विद्यालय जिसमे कभी साप्ताहिक रामचरित मानस का पाठ करवाया जाता था आज उसी दिन उस विद्यालय में साप्ताहिक पुस्तक मेला और कहानी पठन का सत्र चलाया जाता है वो भी उसी विद्यालय के बच्चों के द्वारा बनाये गए पुस्तकालय के किताबों से | आज प्रत्यके साल गर्मीं की छुट्टी में अलग-अलग गतिविधियों को लेकर कार्यशाला भी आयोजित की जाती है | जिसका सारा श्रेय वो इन बच्चों के लिए चालू किये गए एक छोटे स्तर के पुस्तकालय को देतीं हैं जो आस-पास के बच्चों को सोंचने और नव सृजनशील बनाया है |
इसी तौर पर परिवर्तन संस्थान में संचालित पुस्तकालय भी अपने कार्य क्षेत्र के लोगों के लिए एक अलग प्रकार की पहल किया है | हालाँकि परिवर्तन के कार्य क्षेत्र में रहने वाले लोगों का मुख्य पेशा खेती हैं और यहाँ के नौजवान व् अन्य लोग किसी भी नयी जानकारी के लिए सीधे रूप में विद्यालय या इंटरनेट से जुड़े है, और यहाँ के विद्यालयों में पुस्तकालय की व्यवस्था हैं ही नहीं ऐसे में अगर उन्हें किसी भी प्रकार की नविन जानकारी की आवश्यकता होती हैं तो या तो ओ किसी के द्वारा दिए हुए सुझाव का अनुसरण करते हैं या भी इंटरनेट की मदद लेते हैं | और हम लोग तो जानते ही हैं की इंटरनेट पर उपलब्ध सारी जानकारियां सही ही नहीं होती कुछेक जानकारियां गलत भी होती हैं | अगर हमें किसी प्रमाणित और स्पष्ट सुचना या डाटा की आवश्यकता हो, साथ ही साथ इस ग्रामीण जीवन शैली से बाहर की दुनिया के बारे में जानने की इच्छा हो तो हम किताबों पे ही भरोषा कर सकते हैं | इस परिदृश्य को देखते हुए समेकित विकाश की उम्मीद रखने वाला परिवर्तन अपने कार्य क्षेत्र के युवाओं शिक्षकों, बच्चों एवं अन्य जरुरतमंदों के लिए एक पुस्तकालय की स्थापना 2011 में परिवर्तन परिसर में किया | लोगों को एक नयी उम्मीद जगी | प्रारंभ में इसकी सुचना लोगों तक अलग-अलग तरीके से पहुचाई गयी एवं उन्हें परिवर्तन पुस्तकालय का लाभ उठाने के लिए भी प्रेरित किया गया | पिछले 10 सालों के सफ़र में परिवर्तन पुस्तकालय अपने किताबों की संख्या में ही नहीं अपितु पाठकों की संख्या में भी काफी वृद्धि किया है | आस-पास के सरकारी या गैर सरकारी विद्यालयों के बच्चों और शिक्षकों का जुड़ाव परिवर्तन पुस्तकालय से लगातार हो रहा हैं | आज हमारे पास कुछ ऐसे भी बच्चें हैं जो अपने पाठ्य पुस्तक के अलावे पुस्तकालय में उपलब्ध अलग-अलग मासिक पत्रिका के भी नियमित पाठक हैं | पुस्तकालय के प्रत्येक गतिविधियों में बढ़ चढ़ के हिस्सा भी लेते हैं | कभी कभी परिवर्तन द्वारा प्रकशित की जाने वाली अलग अलग पत्रिका के लिए अपने द्वारा लिखी कविता और कहानियों को स्वेच्छा से देते हैं | उनका कहना हैं की इस पुस्तकालय में हमारी रूचि के अनुरूप सारी किताबें हैं | उपलब्ध पत्रिका में अलग-अलग जगह के बच्चों के द्वारा लिखी कविता कहानिया पेंटिंग या कोई लेख हमें भी ऐसे आगे लिखने के लिए प्रेरित करता हैं | शिक्षकों का कहना हैं की इस क्षेत्र के लोगों के लिए ये पुस्तकालय कोई आम पुस्तकालय नहीं हैं बल्कि वरदान हैं और ज्ञान का भंडार भी | इसमे ऐसी-ऐसी किताबें उपलब्ध हैं जो हमारें लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं | किसानों का कहना हैं की इस पुस्तकालय में खेती के नए तकनीक पर आधारित पत्रिका हमें नविन तकनीकों से अवगत करवाती हैं आदि आदि |
परिवर्तन पुस्तकालय का सिर्फ इतना ही उम्मीद नहीं हैं की लोग हमसे आकर जुड़े बल्कि ये उम्मीद हैं की लोगों को पढ़ने के प्रति एवं नित्य नयी जानकारियों के प्रति उत्सुक किया जाये ताकि वो किताबों की दुनिया में जाएँ और ज्ञान रूपी सागर में गोता लगाये |
परिवर्तन समुदाय में समेकित विकाश के जिस क्रांति को लाना चाहता हैं उसकी शुरुआत परिवर्तन पुस्तकालय से ही की गयी हैं और हमें पूरा विश्वास हैं की हमारी टीम इसमे सफल भी होगी और पुरे दुनिया के लिए हम मिशाल भी बनेंगे |

धन्यवाद !
आलोक