तक्षशिला

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तक्षशिला

तक्षशिला एजुकेशनल सोसाइटी 1997 में शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाली एक गैर लाभकारी संस्था के रूप में स्थापित हुई। इसका मूल उद्देश्य उत्कृष्ट शिक्षा सम्बन्धी योजनाओं पर काम करना है. उत्कृष्ट शिक्षा में सह-पाठ्यक्रम के अवदान पर विशेष तौर पर ध्यान दिया गया है । आज के ग्लोबल माहौल की चुनौतियों का छात्र सामना कर सकें, ग्लोबल स्पेस में अपना स्थान बना सकें और अपने भारतीय मूल्यों को भी साथ लेकर चलें, ऐसी गुणनात्मक योजना पर अमल हो रहा है। इसके साथ ही अपने सामाजिक आदर्शों, पर्यावरण का आदर और अपनी परंपरागत विरासत, नृत्य-संगीत-कला एवं साहित्य को ससम्मान वैश्विक परिपेक्ष्य में स्थापित कर सकें ऐसी शिक्षा से छात्र संपूरित हों यह भी तक्षशिला का केंद्रीय विचार रहा है।

तक्षशिला के अंतर्गत चार शहरों पटना, पुणे, कोयम्बतूर और लुधियाना में दिल्ली पब्लिक स्कूल संचालित हो रहे हैं, जहाँ 11,500 छात्र शिक्षा प्राप्त कर रहें हैं. इन स्कूलों में 1150 शिक्षक और सहयोगी काम करते हैं।

तक्षशिला का यह भी मानना है कि शिक्षा सभी के लिए है और समाज के विभिन्न वर्गों, समुदायों, कस्बाई क्षेत्रों और ग्रामीण समाज से इसे जोड़ने की ज़रूरत है। इसी को ध्यान में रखते हुए तक्षशिला ने समेकित ग्रामीण विकास के लिए गाँव नरेन्द्रपुर, जिला सिवान, बिहार में परिवर्तन परिसर की स्थापना की है जहाँ – गाँव के बीच शिक्षा और ग्रामीणों के आर्थिक और सामाजिक सबलीकरण की योजनायें चलायी जाती हैं।

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में तक्षशिला ने–सेण्टर फॉर चिल्ड्रेन्स लिटरेचर एंड आर्ट की स्थापना की है. इस सेंटर का नाम ‘एकतारा’ है। यह बच्चों के भीतर की रचनात्मक भाषावाली को कला और साहित्य के माध्यम से विकसित करने में प्रयत्नरत है। यहाँ से निकलने वाली छोटे बच्चों की पत्रिका ‘प्लूटो’ देश भर में लोकप्रिय हो चुकी है।

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी तक्षशिला का टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज आदि के साथ  साझेदारी कर रहा है भविष्य में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में और गतिशील हस्तक्षेप की योजना है।

तक्षशिला भारत की समृद्ध संस्कृति का संरक्षक और प्रतिपालक रहा है। भारत के विभिन्न शहरों में तक्षशिला ने शास्त्रीय तथा अन्य गीत संगीत, नृत्य, कला प्रदर्शनियां, थिएटर और साहित्य की सभाएं करवाई हैं और ऐसे आयोजन करने वालों को अपना योगदान दिया है।